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हिमाचल में इकलौता कामाक्षा माता मंदिर, जहां आए थे भगवान परशुराम Kamaksha Devi Temple Karsog

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कामाक्षा मंदिर, करसोग: हिमाचल की पवित्र स्थली- Kamaksha Devi Temple Karsog

हिमाचल प्रदेश के मन्दिरों और शक्तिपीठों से भरपूर प्रदेश में करसोग क्षेत्र का कामाक्षा मंदिर एक पवित्र धाम है। यहां के आदिवासी तंत्रों में छिपे रहस्यों और पुरातात्विक विवादों के बावजूद, यह मंदिर एक अनूठी तात्कालिक पूजा पद्धति के लिए प्रसिद्ध है।

Kamaksha Devi Temple Karsog स्थान का महत्व:

करसोग क्षेत्र, मंडी जिला, हिमाचल प्रदेश में स्थित कामाक्षा मंदिर देवभूमि की शोभा में विशेष है। यहां के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की तरह, यह मंदिर भी शक्तिपीठों की श्रृंगार धारा को सूचित करता है और हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

Kamaksha Devi Temple Karsog कामाक्षा मंदिर:

कामाक्षा मंदिर ने अपने पूजा पद्धतियों और प्राचीनता के साथ हिमाचल के धार्मिक सांस्कृतिक को नए आयाम दिए हैं। यहां की पूजा का अलग-अलग रूप, तीन मतों की पूजा के अलग-अलग विधान, और भगवान परशुराम के आगमन का उल्लेख है, जो इसे अनूठा बनाता है।

Kamaksha Devi Temple Karsog विशेषताएं:

मंदिर में पूजा की अद्वितीयता ने इसे अग्रणी बनाया है। यहां तीन मतों के अलग-अलग विधान से भगवान परशुराम और कामाक्षा देवी की पूजा की जाती है, और यह एक अनूठी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

Kamaksha Devi Temple Karsog इतिहास और महत्व:

मंदिर का इतिहास राजा सुकेत के शासनकाल से जुड़ा हुआ है, जब उन्होंने देवी कामाक्षा की मूर्ति को स्थापित करते हुए एक भव्य मंदिर की नींव रखी थी। मंदिर का नाम जयदेवी से जुड़ा है, जो राजा सुकेत की रानी थी, और मंदिर के नाम स्थान के रूप में आया।

कामाक्षा देवी मंदिर – Kamaksha Devi Temple

मान्यताएं:

इस मंदिर का महत्व यहां के लोगों के बीच एक मान्यता है कि यह देवी कामाक्षा का शक्तिपीठ सतयुग से है, जो प्रमुख युगों की शक्ति और देवी स्वरूपी है।

पूजा और मेले:

मंदिर में पूजा और मेलों की विशेषता है। पूजा का विधान अद्वितीयता से भरपूर है और मेलों के दौरान पांडव काल की अष्टधातु की मूर्तियों को रथ पर विराजित किया जाता है। साल में दो बार होने वाले मेले में लाखों की भीड़ उमड़ती है, और लोग दूर-दूर से इस मौके के दर्शन के लिए यहां आते हैं।

पुरातात्विक संरचना:

मंदिर का निर्माण प्राचीन शैली में किया गया है, और पहले यह पत्थर का था, लेकिन डेढ़ दशक पहले इसे लकड़ी से नया रूप दिया गया।

बलि प्रथा का विरोध:

मंदिर में पहले बलि प्रथा होती थी, जो बैरिक विवादों का कारण बनी रही। इसके विरोध में पुजारी बंसीलाल ने उत्कृष्ट यात्रा की, और हाईकोर्ट ने हिमाचल में इस प्रथा पर रोक लगा दी।

करसोग का कामाक्षा मंदिर एक ऐतिहासिक, धार्मिक, और सांस्कृतिक धरोहर है जो भक्तों को अपनी श्रद्धा और आस्था से परिपूर्ण करता है।

यहां का माहौल प्राचीनता की महक को महसूस कराता है और परंपरागत तंत्रों और मौजूदा धाराओं को संजीवनी दे रहा है।

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